स्वामी विवेकानंद
WEeb.in Team Biography Total Views: 1108 Posted: Jan 7, 2020 Updated: Jun 12, 2026
स्वामी विवेकानंद कौन हैं?
स्वामी विवेकानंद श्री रामकृष्ण परमहंस के महान शिष्य थे। वह अपनी तर्कसंगत सोच और महान नेतृत्व गुणों के कारण लोकप्रिय हैं।
उन्होंने मानवता के उत्थान के लिए कड़ी मेहनत की। शिकागो में आयोजित एक धार्मिक सम्मेलन में एक प्रेरक भाषण देने के बाद उनकी बड़ी संख्या में प्रशंसक बन गए।
उन्होंने हिंदू धर्म का समर्थन किया और पूर्वी और पश्चिमी संस्कृति दोनों पर अपने आध्यात्मिक विचारों को बहादुरी से सामने रखा। आज भी लोग उनके विचारों और भाषणों से प्रेरित होते हैं।
स्वामी विवेकानंद एक महान हिंदू संत और धार्मिक नेता थे। उन्होंने रामकृष्ण मिशन और रामकृष्ण मठ की स्थापना की।
जन्म और प्रारंभिक जीवन: उनका जन्म 12 जनवरी, 1863 को कोलकाता में हुआ था। उनका मूल नाम नरेंद्रनाथ दत्ता था। उनके माता-पिता विश्वनाथ दत्ता और भुवनेश्वरी देवी थे।
वह एक असाधारण बच्चा था। आध्यात्मिक विचारों में उनकी गहरी रुचि थी। उन्होंने मेट्रोपॉलिटन स्कूल से प्रवेश परीक्षा पास की। उन्होंने कोलकाता के स्कॉटिश चर्च कॉलेज से कला स्नातक पूरा किया।
छोटी उम्र में ही उन्हें रामकृष्ण से मिलने का अवसर मिला। यह उनके जीवन की एक महत्वपूर्ण घटना थी। उन्होंने दक्षिणेश्वर में रामकृष्ण के पास जाना शुरू किया। बाद में, वह रामकृष्ण के शिष्य बन गए। रामकृष्ण दक्षिणेश्वर में काली मंदिर के पुजारी थे।
वेदांत आंदोलन: प्रसिद्ध वेदांत आंदोलन का नेतृत्व स्वामी विवेकानंद ने किया था। उन्होंने पश्चिमी देशों में हिंदू धर्म के भारतीय दर्शन का परिचय दिया।
शिकागो भाषण: 11 सितंबर, 1893 को, उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व किया और शिकागो में आयोजित विश्व धर्म संसद में एक संक्षिप्त भाषण दिया। उनके संक्षिप्त भाषण को अब तक के सबसे महान भाषणों में से एक माना जाता है। इसने न केवल उन्हें बल्कि पूरे देश में प्रसिद्धि अर्जित की।
योगदान: बहुत कम समय में, उन्होंने हिंदू धर्म को एक महत्वपूर्ण विश्व धर्म के रूप में स्थापित किया। उन्हें हिंदू धर्मग्रंथों का गहन ज्ञान था जैसे कि चार वेदों, उपनिषदों, पुराणों और भगवत गीता आदि के रूप में। उन्होंने विश्व दर्शकों के सामने हिंदू धर्म का बचाव किया और इन शास्त्रों के प्राचीन ज्ञान को सफलतापूर्वक पुनर्जीवित किया। विवेकानंद के प्रमुख कार्यों में कर्म योग, राज योग, भक्ति योग और शामिल हैं। ज्ञान योग।
शिक्षाएं: उन्होंने युवक-युवतियों से आगे आकर समाज की मदद करने को कहा। उन्होंने उन्हें निःस्वार्थ रूप से अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने के लिए कहा।
उन्होंने लोगों को निडर बनना सिखाया। उन्होंने बताया कि हर इंसान के भीतर असीमित शक्तियां होती हैं।
लोग आज भी उनके प्रसिद्ध उद्धरण को याद करते हैं, & rdquo;उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए”। उनके विचारों ने युवाओं को प्रेरित किया
निष्कर्ष: उनके संदेश ने २०वीं सदी में राष्ट्रीय जागरण में भारत के कई नेताओं को प्रभावित किया। उन्होंने अपने देशवासियों से खुद में विश्वास पैदा करने को कहा। ४ जुलाई १९०२ को ३९ वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया।
Swami Vivekananda (Rean in English)
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